किर्गिज़स्तान-ताज़िकिस्तान सीमा तनाव : अन्तराष्ट्रीय सम्बन्ध 


किर्गिज़स्तान-ताज़िकिस्तान सीमा तनाव : अन्तराष्ट्रीय सम्बन्ध


हाल ही में किर्गिज़स्तान-ताज़िकिस्तान सीमा पर हुई हिंसक झड़प के बाद दोनों देशों द्वारा युद्ध विराम को लेकर सहमति व्यक्त की गई है। ज्ञात हो कि इस हिंसक झड़प के दौरान तकरीबन 40 लोगों की मृत्यु हुई है, जबकि 175 लोग लगभग घायल हुए हैं। 

  • किर्गिज़स्तान और ताज़िकिस्तान, मध्य एशिया क्षेत्र में शामिल देश हैं। इस क्षेत्र के अन्य देश कज़ाखस्तान, तुर्कमेनिस्तान और उज़्बेकिस्तान हैं।

प्रमुख बिंदु:

पृष्ठभूमि:

  • दोनों राष्ट्रों द्वारा ‘कोक-तश’ (Kok-Tash) के आस-पास के क्षेत्र पर अपना-अपना दावा प्रस्तुत किया जाता है, यह एक जल आपूर्ति उपलब्ध कराने वाला क्षेत्र है। तथा यह विवाद दोनों देशों के बीच तब से चला आ रहा है, जब से यह क्षेत्र दशकों पूर्व सोवियत संघ का हिस्सा था।
  • वर्ष 1991 के उत्तरार्ध में रूसी सोवियत संघीय समाजवादी गणतंत्र  (Union of Soviet Socialist Republics- USSR) के पतन के साथ ही किर्गिज़-ताजिक सीमा विवाद की वर्तमान रूपरेखा निर्मित हो गई थी।
  • ताज़िकिस्तान और किर्गिज़स्तान के मध्य सीमा विशेष रूप से तनावपूर्ण है, क्योंकि दोनों देशों के मध्य निर्मित 1,000 किलोमीटर लंबी सीमा में से एक तिहाई से अधिक विवादित है। जिन समुदायों की भूमि और जल तक पहुँच सुनिश्चित नहीं है, अतीत में अक्सर उन समुदायों के मध्य घातक संघर्ष होते रहे हैं।

अंतर्राष्ट्रीय प्रतिक्रिया:

  • रूस और यूरोपीय संघ (European Union- EU) ने युद्ध विराम समझौते का स्वागत किया तथा दोनों देशों के मध्य एक स्थायी और शांतिपूर्ण समाधान की आवश्यकता पर ज़ोर दिया।

भारत के लिये मध्य एशिया का महत्त्व:

  • राजनीतिक:
    • सुरक्षा, ऊर्जा, आर्थिक अवसरों आदि क्षेत्रों में भारत के मध्य एशिया में व्यापक हित निहित हैं।
    • भारत में शांति और आर्थिक विकास हेतु मध्य एशिया में सुरक्षा, स्थिरता और समृद्धि अनिवार्य है।
    • मध्य एशिया, एशिया और यूरोप के मध्य एक भू-सेतु के रूप में कार्य करता है, जो कि इसे भारत के लिये भू-राजनीतिक धुरी के रूप से स्थापित करता है।
    • भारत और मध्य एशियाई गणराज्य (Central Asian Republics-CARs) दोनों ही विभिन्न क्षेत्रीय और विश्व मुद्दों पर कई समान धारणाओं को साझा करते हैं, जो क्षेत्रीय स्थिरता प्रदान करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
  • आर्थिक:
    • यह क्षेत्र प्राकृतिक संसाधनों जैसे- पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस, एंटीमनी, एल्यूमीनियम, सोना, चांदी, कोयला और यूरेनियम से समृद्ध है, जिसका उपयोग भारत अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं के अनुसार सबसे बेहतर तरीके से  कर सकता है।
    • मध्य एशिया में विशाल कृषि योग्य क्षेत्र बिना किसी उत्पादकता के बंजर पड़ा हुआ है, इस क्षेत्र का दालों की खेती हेतु उचित उपयोग किया जा सकता है।
    • मध्य एशियाई गणराज्य तेज़ी से उत्पादन, कच्चे माल और सेवाओं की आपूर्ति हेतु वैश्विक बाज़ार से जुड़ रहे हैं। वे पूर्व-पश्चिम ट्रांस-यूरेशियन ट्रांजीशन आर्थिक गलियारों के साथ तेज़ीसे एकीकृत हो रहे हैं।
  • भारतीय पहल:
    • भारत की योजना अंतर्राष्ट्रीय उत्तर दक्षिण परिवहन गलियारे (expansion of International North South Transport Corridor- INSTC) का अफगानिस्तान और उज़्बेकिस्तान तक विस्तार करने की है।
    • यह यूरेशियन बाज़ारों तक पहुँचने और इसके उपयोग को बेहतर ढंग से संचालित करने हेतु एक महत्त्वपूर्ण प्रवेश द्वार के रूप में कार्य करेगा और इसके तहत मध्य एशियाई देशों का प्रत्यक्ष हितधारक के रूप में शामिल होना अनिवार्य है।
  • भारत-मध्य एशिया वार्ता:
    • भारत और मध्य एशियाई देशों के बीच विकास साझेदारी को आगे बढ़ाने हेतु भारत द्वारा 'भारत-मध्य एशिया विकास समूह' की स्थापना का प्रस्ताव रखा गया है।
    • यह समूह भारत को चीन द्वारा बड़े पैमाने पर संसाधन संपन्न क्षेत्र में किये गए अतिक्रमण तथा अफगानिस्तान में प्रभावी ढंग से आतंक से खिलाफ लड़ने हेतु अपना विस्तार करने में मदद करेगा।

    भारत-किर्गिज़स्तान

    राजनीतिक:

    • वर्ष 1991 से भारत और किर्गिज़स्तान के मध्य  मज़बूत द्विपक्षीय संबंध स्थापित हैं।
    • वर्ष 1992 में भारत, किर्गिज़स्तान के साथ राजनयिक संबंध स्थापित करने वाला पहला देश था।

    संस्कृति और आर्थिक:

    • वर्ष 1992 से दोनों देशों के मध्य  कई समझौते हुए हैं, जिनमें संस्कृति, व्यापार और आर्थिक सहयोग, नागरिक उड्डयन, निवेश प्रोत्साहन और संरक्षण, दोहरे कराधान से बचाव, काउंसलर कन्वेंशन आदि शामिल हैं।

    सैन्य:

    • वर्ष 2011 में भारत और किर्गिज़स्तान के मध्य संयुक्त 'खंजर' (Khanjar) अभ्यास शृंखला की शुरुआत की गई।

    भारतीय प्रवासी:

    • किर्गिज़स्तान में लगभग 9,000 भारतीय छात्र विभिन्न चिकित्सा संस्थानों में अध्ययन कर रहे हैं। इसके अलावा, किर्गिज़स्तान में रहने वाले कई भारतीय व्यापारी हैं, जो व्यापार और कई अन्य सेवाओं में संलग्न हैं।
  • रणनीतिक:

    • किर्गिज़ नेताओं द्वारा काफी हद तक कश्मीर पर भारत के रुख का समर्थन किया जाता रहा है।
    • किर्गिज़स्तान द्वारा संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (United Nations Security Council- UNSC) में  स्थायी सीट हेतु भारत का समर्थन किया गया हैं।
  • भारत-ताज़िकिस्तान:

    राजनीतिक:

    • वर्ष 2012 में भारत और ताज़िकिस्तान द्वारा अपने  द्विपक्षीय संबंधों को  रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक बढ़ाया गया था।
    • ताज़िकिस्तान ने शंघाई सहयोग संगठन ( Shanghai Cooperation Organization- SCO) तथा विस्तारित यूएनएससी की स्थायी सदस्यता हेतु भारत का  समर्थन किया।
    • वर्ष 2013 में भारत द्वारा विश्व व्यापार संगठन (World Trade Organization) में तज़ाकिस्तान को शामिल किये जाने का समर्थन किया गया।

    सांस्कृतिक और आर्थिक:

    • आवागमन में लगने वाले अधिक समय और सुलभ व्यापार मार्गों की कमी के कारण दोनों देशों के प्रयासों के बावजूद दोनों पक्षों के मध्य व्यापार अपेक्षाओं के अनुरूप नहीं रहा है।
    • इन सीमाओं के बावज़ूद, खाद्य प्रसंस्करण, खनन, फार्मास्यूटिकल्स, वस्त्र, कौशल विकास, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, सूचना प्रौद्योगिकी, संस्कृति और पर्यटन आदि क्षेत्र में दोनों देशों के मध्य व्यापार जारी है।

    भारत द्वारा मदद: 

    • वर्ष 2001-02 में भारत द्वारा ताज़िकिस्तान को प्रमुख खाद्य सहायता उपलब्ध कराई गई। जनवरी-फरवरी 2008 में अत्यधिक सर्दी से उत्पन्न संकट को दूर करने हेतु भारत द्वारा 2 मिलियन अमेरिकी डॉलर (नकद सहायता के रूप में 1 मिलियन अमरीकी डॉलर तथा पावर केबल, जनरेटर और पंप सेट हेतु  1 मिलियन अमरीकी डॉलर) की मदद की गई।
    • नवंबर 2010 में भारत द्वारा संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (United Nations Children’s Fund- UNICEF) के माध्यम से ओरल पोलियो वैक्सीन की 2 मिलियन खुराक उपलब्ध की गईं।
    • मार्च 2018 में भारत द्वारा रूस में निर्मित 10 एम्बुलेंस ताज़िकिस्तान के विभिन्न क्षेत्रों में उपहार स्वरूप दी गई, इससे भारत को काफी अधिक मीडिया कवरेज प्राप्त हुई थी। और उच्च अधिकारियों द्वारा भारत की प्रशंसा की गई थी।

    भारतीय प्रवासी:

    • ताज़िकिस्तान में भारतीयों की कुल संख्या लगभग 1550 है, जिनमें से 1250 से अधिक छात्र हैं।
    निष्कर्ष :
    • भौगोलिक रूप में शताब्दियों से राजनीतिक और आर्थिक परिवर्तनों के गठजोड़ में मध्य एशिया का महत्त्वपूर्ण स्थान रहा है। बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव, भारत की कनेक्ट सेंट्रल एशिया नीति और यूरोपीय संघ की नई मध्य एशिया रणनीति के साकार होने के साथ, ही 21वीं सदी संभवतः इस क्षेत्र के लिये सबसे निर्णायक अवधि हो सकती है।
    • अपने ऐतिहासिक सांस्कृतिक और आर्थिक संबंधों के चलते भारत अब इस क्षेत्र के विकास में अधिक सक्रिय भूमिका निभाने हेतु तैयार है। SCO जैसे बहुपक्षीय मंचों पर भारत की बढ़ती वैश्विक भागीदारी और महत्त्वपूर्ण भूमिका ने भारत को इस क्षेत्र में एक पर्यवेक्षक के रूप में स्थापित किया है।
    • मध्य एशिया भारत को अपनी सीमाओं से परे, यूरेशिया में अग्रणी भूमिका निभाने हेतु राजनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक संबंधों का लाभ उठाने हुए एक मज़बूत मंच प्रदान करता है।

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